प्यार और अक्षर
प्यार और अक्षर
मेरा प्यार वो नहीं
जो मैं दुनिया को दिखा रहा हूं ।
प्यार वो है मेरा जो
तुम संग दिल से निभा रहा हूं ।
तुम बिन मैं अकेला अधूरा
तुम्हारी आदत हो गई है ।
तुम जरूरत नहीं
फिक्र हो मेरी ।
बोल न पाऊं वो
जिक्र हो मेरी ।
शत् प्रतिशत
प्रेम मेरा हमेशा सिर्फ
तुमसे ही था,है और रहेगा
यह समझ लो ।
फिर
चाहे तुम मुझे मेरे प्यार को
नजर अंदाज करते रहो ।
सूनों
सिर्फ मोहब्बत
ही नहीं हुई मुझे तुमसे,
है एक ख्वाइश भी तुम संग
जीवन व्यतीत करने की ।
तुम्हें गर पता न हो
पर
सिर्फ मेरे आंसू ही
गवाही दे सकते है
की कितनी शिद्दत से
तुम्हें चाहा है मैंने ।
कल तक अजनबी थे हम तुम,
एकं दूसरे से
आज दिल की मेरी
एक एक धड़कन में
गुंजता है नाम तुम्हारा ।
खुशबू से तुम्हारी
इतना वाकिफ हूं मैं
के हजारों चहेरो में भी,
ढूंढ सकता हूं तुम्हें मैं ।
मंजूर है मुझे
अगर सारी दुनिया रूठ जाये
परवाह नहीं मुझे,
पर,
बस जब रहती खामोश तुम
तकलीफ बेहद होती है मुझे ।
तुमसे जो प्यार है मेरा वो
तुम्हारे मन से, तुम्हारी सोच से
तुम्हारी सादगी से,
तुम्हारी भाव भरी आंखों से,
तुम्हारी निर्लेप निर्दोष मुस्कुराहट से है ।
तुम्हारे साथ मेरा
रुह से रुह तक का रिश्ता है ।
हां, नहीं किया मैंने प्यार तुम्हारे
शारीरिकार्षण से,
ना त्वचा के रंग से ।
यह तुम जान लो के
तुम्हारी धड़कन ही मेरी
ज़िंदगी का किस्सा है ।
मेरी जिंदगी का तुम
अहम् हिस्सा हो ।
बहुत होंगे दुनिया में
चाहने वाला तुम्हें।
मै अंतिम छोर पर ही सही
लेकिन
मेरे लिए तुम ही मेरी दुनिया हो ।
हमारा रिश्ता सिर्फ
प्यार का ही नहीं है ।
तुम्हारी हँसी और मेरी खुशी
का भी एक रिश्ता है ।
इसी लिए वर्णमाला मैं मुझे
घ,न,अ अक्षर ज्यादा पंसंद है।

