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ritesh deo

Romance Tragedy

4  

ritesh deo

Romance Tragedy

प्यार और अक्षर

प्यार और अक्षर

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मेरा प्यार वो नहीं 

जो मैं दुनिया को दिखा रहा हूं ।

प्यार वो है मेरा जो 

तुम संग दिल से निभा रहा हूं ।

तुम बिन मैं अकेला अधूरा

तुम्हारी आदत हो गई है ।

तुम जरूरत नहीं 

फिक्र हो मेरी ।

बोल न पाऊं वो 

जिक्र हो मेरी ।

शत् प्रतिशत 

प्रेम मेरा हमेशा सिर्फ 

तुमसे ही था,है और रहेगा 

यह समझ लो ।

फिर 

चाहे तुम मुझे मेरे प्यार को

नजर अंदाज करते रहो ।

सूनों 

सिर्फ मोहब्बत 

ही नहीं हुई मुझे तुमसे,

है एक ख्वाइश भी तुम संग 

जीवन व्यतीत करने की ।

तुम्हें गर पता न हो 

पर

सिर्फ मेरे आंसू ही 

गवाही दे सकते है 

की कितनी शिद्दत से 

तुम्हें चाहा है मैंने ।

कल तक अजनबी थे हम तुम,

एकं दूसरे से

आज दिल की मेरी 

एक एक धड़कन में 

गुंजता है नाम तुम्हारा ।

खुशबू से तुम्हारी 

इतना वाकिफ हूं मैं 

के हजारों चहेरो में भी,

ढूंढ सकता हूं तुम्हें मैं ।

मंजूर है मुझे 

अगर सारी दुनिया रूठ जाये 

परवाह नहीं मुझे,

पर,

बस जब रहती खामोश तुम 

तकलीफ बेहद होती है मुझे ।

तुमसे जो प्यार है मेरा वो

तुम्हारे मन से, तुम्हारी सोच से

तुम्हारी सादगी से, 

तुम्हारी भाव भरी आंखों से, 

तुम्हारी निर्लेप निर्दोष मुस्कुराहट से है ।

तुम्हारे साथ मेरा

रुह से रुह तक का रिश्ता है ।

हां, नहीं किया मैंने प्यार तुम्हारे

शारीरिकार्षण से, 

ना त्वचा के रंग से ।

यह तुम जान लो के

तुम्हारी धड़कन ही मेरी 

ज़िंदगी का किस्सा है ।

मेरी जिंदगी का तुम

अहम् हिस्सा हो ।

बहुत होंगे दुनिया में 

चाहने वाला तुम्हें।

मै अंतिम छोर पर ही सही 

लेकिन 

मेरे लिए तुम ही मेरी दुनिया हो ।

हमारा रिश्ता सिर्फ 

प्यार का ही नहीं है ।

तुम्हारी हँसी और मेरी खुशी 

का भी एक रिश्ता है ।

इसी लिए वर्णमाला मैं मुझे

घ,न,अ अक्षर ज्यादा पंसंद है।


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