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Mahendra Kumar Pradhan

Romance Tragedy Classics

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Mahendra Kumar Pradhan

Romance Tragedy Classics

पुरानी यादें ताजे हुए ।

पुरानी यादें ताजे हुए ।

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मेरे तकदीर के झोले में 
तुम ही सबसे अनमोल और कीमती हो 
मेरे मां के उपरांत
 इस संसार में,
तुमसे मिलकर लगा कि
मुझसे भाग्यवान और कहां?

तुमसे भाव मिले
भावनाएं मिली ,
तन में आग लगी 
यौवन की कामनाएं खिली ।
और जब दो तन मिले 
दो मन मिले 
रात्रि की निर्जन बेला में ,
रंगीन हो उठा मेरा सारा जहाँ।  

इच्छाएँ जागती थीं 
और चुपके चुपके 
शांत हो जाती थीं 
निर्मल प्रेम की धारा में 
भरा यौवन इठलाता 
निनाद करता , उछलता 
और सैलाब लाता 
फिर भी सब हलचल 
खामोश और शांत हो जाती 
बस तुम्हारी उपस्थिति में ।

फूलते यौवन  का बाढ़ भी
थम सा जाता तुम्हे स्पर्श कर
हिम हो जाते 
तन में फूटते अंगारे 
क्या सुकून था
उस गुप्त अनुराग के तट पर 
तुम्हें पाकर लगता ऐसा कि
सारा कायनात मेरा है । 

पर आज पाता हूं अपने को
मल्लिका के कालिदास की भांति 
विवश लाचार 
या फिर पारो के देवदास के रूप में 
अपने सपनों में जीता 
अतीत के संयोग श्रृंगार के याद में 
अश्रु को पीता 
फिर एक हतभागा प्रेमी  बनकर 
कागज के पन्नों में
अपने अनुभूतियों को
कभी संकुचित तो कभी उन्मुक्त खयालों से
कविता का रूप दे जाता ।

पुरानी यादें ताजे होते
प्रिय प्रवास पढ़ते पढ़ते 
उन गजलों में ढूंढता हूं 
कभी कभी अपनी परछाई को 
जो विरह की ज्वाला से निकली 



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