STORYMIRROR

Mahendra Kumar Pradhan

Tragedy Classics Inspirational

4  

Mahendra Kumar Pradhan

Tragedy Classics Inspirational

समय क्या नहीं करता है ?

समय क्या नहीं करता है ?

2 mins
2

समय क्या नहीं करता है ?
कभी अच्छे को बुरा  
 तो कभी बुरे को भी अच्छा बना देता है ।

समय समय पर
बदलती रहती हैं हालातें .
कभी ईमान बिक जाता है 
तो कभी सम्मान ।

एक पांडव था  - धर्मराज 
प्रतिकूल समय हो या युद्ध 
मति उसका हमेशा स्थिर रहता 
सभी अनुजों और धर्मपत्नी को मृत देख भी 
यक्ष के जटिल प्रश्नों का उचित उत्तर 
धीर वीर युधिष्ठिर देता ,

पर समय जब विकराल हुआ 
गुरु द्रोण के रूप में
सामने खड़ा जब काल हुआ 
कुरुक्षेत्र रणभूमि में
पृथ्वी अम्बर साक्षी हैं 
उसने भी असत्य कहा ,
यदि असत्य न माने 
तो अर्धसत्य कहा । 
हिंसा द्वेष क्रोध मोह  छल आदि
सभी दोषों को जीतनेवाला 
नियति के अंतिम निर्णय में ,
निर्दोष कहां रहा ?
 
समय क्या नहीं करता है?
धर्मज्ञ को भी कभी कभी 
विवश लाचार बना जाता है। 


चलो ठीक है
मनुष्यों को नहीं
प्रकृति पर विचार विमर्श करते हैं ।

गाँव के समीप से गुजरती 
मेरी प्यारी महानदी को
बचपन से देखता आ रहा हूँ ,
सूख जाती है गर्मी में तपकर 
प्यास बुझाने में असमर्थ ,पर 

वर्षा में बाढ़ लाती   है 
खा जाती है हरी भरी फसलें,
बना बसाया घर  ,
मैली हो जाती है पानी 
काया उसकी खूब डरावनी 
कालसर्प सी फुफकार 
चारों ओर जीवन के लिए 
शंकित जीवों की हाहाकार ।

लेकिन
शरद के आते ही 
हो जाती है पावन ,निर्मल 
कलकल करती बहती
सबकी प्यास बुझाती 
वक्ष में लिए स्वच्छ शीतल जल ,
बन जाती है  अमृत की धारा 
माँ की मूरत , स्निग्ध सुकोमल ।

समय क्या नहीं करता है ?
नदी को भी कभी सौम्य - सजीव 
तो कभी शुष्क कंकाल बना देता है ,
कभी आह्लादिनी,जीवनदायिनी 
तो कभी विकराल बना देता है ।

बंधु ! समय जब भारी होता है
मनुष्य क्या ?
नियति भी चरित्र बदल देता है ।

समय क्या नहीं करता है ?








विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy