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Mahendra Kumar Pradhan

Inspirational

3.9  

Mahendra Kumar Pradhan

Inspirational

शहीद

शहीद

2 mins
461


दो दिनों का उत्सव मनाना

जश्न - ए - आजादी का ही 

सबकुछ नहीं होता साहेब

देशभक्ति ,देशप्रेम और 

मातृभूमि के वास्ते ।


वतन तो बलिदान मांगता है 

कर्ज मातृत्व की चुकाने को 

मां की आन बान शान बढ़ाने को

यदि सज्ज हो तुम धीर वीर 

शहादत के रास्ते । 


मत चढ़ाओ कीमती पुष्पहार 

शहीदों के मूर्तियों पर 

यदि फिर न आओगे दोबारा 

पूरे एक साल तक 

पूछने उनकी हाल ।


बंदूक की गोलियां, संगीन की धार 

रुला न पाया जिन जवानों को,

क्यों रोते हैं उनके बेजान मूरत ?

क्या सर्दी ,धूप ,तूफ़ान से परेशान हैं ?

क्या है उनके दिल का मलाल ?


झांक कर देखो तो जरा 

कभी कभी पड़ोसी शहीद के घर

सकुशल तो हैं ना उनके मां बाप ?

कहीं त्योहारों में नए वस्त्र ,मिठाई के लिए

रो तो नहीं रहे हैं उनके अबोध 

दिल के टुकड़े प्यारे लाल ?


उसी चौराहे पर कल जिस 

विधवा औरत और जवान लड़की पर 

छेड़खानी हुई ,कहीं वो उस शहीद की

बीबी और बहन तो नहीं ?

तब से चेहरा हो गया है उसका

अंगारे सम ब्रह्मलाल ।


खेद नहीं है उसके मन में 

अपने जान के कुर्बानी की ।

खेद है तो देख यहां पर

भ्रष्टाचार, कालाबाजारी ,शोषण 

मानवता में फैला प्रदूषण 

दीमक भांति चर रहा है जो

मातृभूमि को जड़ से चेतन ।


जिसने उठाई राष्ट्र रक्षा की बीड़ा 

उस शहीद आत्मा को यदि है पीड़ा 

तो सोचो हमारे करम धरम 

किस कीचड़ दलदल में पड़े हैं ?

मुझे तो लगता है कि हम 

आजादी के अर्ध शताब्दी बाद भी 

जहां के तहां खड़े हैं । 


फिर भी प्रतीक्षा है, आशा है 

एक सुखद स्वस्थ सतेज़ भोर होगा ।

मानवता की झंकार बिहंगो के मुख से 

गुंज,प्रशांति अमन चौं ओर होगा ।

तन मन प्रमुदित जन जन प्रफुल्लित 

भारतवर्ष हर्ष उल्लास विभोर होगा ।



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