Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Mahendra Kumar Pradhan

Inspirational


3  

Mahendra Kumar Pradhan

Inspirational


सिगरेट

सिगरेट

1 min 11.7K 1 min 11.7K

कोई शौक से पीता है, तो कोई अमीरी दिखाने को ,

पर जब चढ़ जाता है नशा , छोड़ना नामुमकिन है ।

कमबख्त ये सिगरेट ! जानलेवा है धीर जहर जैसा 

पर इसके भक्तों को इस बात का कहां यकीन है ?

ये धूम्रपान का लत कातिलाना, जो लग गया एकबार 

श्वास तंत्र को क्षीण और फेफ़डे को अकर्मण्य कर देता है ।

इस धीर जहर का चस्का जिसको लगा उसके तनमन,

और बदन को बीमार और अस्वास्थ्य घेर लेता है ।

सुडौल ,गठीला बदन हो या भीमकाय स्वरूप हो

सिगरेट की धूम्र से वो सब कंकाल बन गया ।

हड्डियों का अवशेष रह गया ,बाकी सब चर गया 

शौक कब नशा बनकर जीवन का काल बन गया ।

देखो और सीखो बंधु , दूर से नमस्कार करो 

धूम्रपान से बचो अन्यथा जीवन दुष्कर हो जाएगा ।

संभालो खुद को, अपने ही पैरों पर चोट न मारो 

मूर्खता छोड़ो अन्यथा जीवन कष्टकर हो जाएगा ।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Mahendra Kumar Pradhan

Similar hindi poem from Inspirational