STORYMIRROR

Shyam Kunvar Bharti

Inspirational

4  

Shyam Kunvar Bharti

Inspirational

चित चितवत

चित चितवत

1 min
93

चंचल रूप चित चितवत निखरत निरखत नैन हारे 

बिजुरी सम चमकत दमकत हिय प्रिय चैन हमारे 


लपकत डोलत झुकत कटी कोमल डोलत कमल डार 

पाँव रखत पायल छम छम छमकत बोलत हिय हाय  


चपल पलक झपकत गिरत उठत बिजुरी गिरि जाय 

पडत नजर जिस ओर रखी हिय हाथ हाय चिल्लाय 


गजरा महकत कजरा दहकत रोम रोम पुलकत जाय 

अधर धरत मुसकात मन मोहिनी कपोल हरसत हर्षाय 


कमर कटिली कारी केस जस नागिन बलखत लहरात 

चाल चलत हिरनी वन कुलांचत उछलत देह भहरात  


राग अलापत कोकिल बोलत गोरी कंठ सुरीली बोलत 

कांपत अधर रसीले धिरकत टप मिसरी मीठ घोलत 


पवन वेग जब आंचर लहरत अवलोकत जीय सिहरत 

उड़त गिरत नभ डोलत कर कपाल धरी हिय अचरज  


नख सीख उतरत स्वर्ग परी सम पिय पिय खोजत 

प्रेम रस घोलत जोहत कत तुम श्याम मुरली सोहत।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational