STORYMIRROR

निशान्त मिश्र

Inspirational

4  

निशान्त मिश्र

Inspirational

"युग-पुरुष की आरती"

"युग-पुरुष की आरती"

1 min
101

माँ भारती निज कोख के, दैदीप्यमान पार्थ की

शुभ आरती उतारती, स्वयंप्रभा सुभारती


गंभीर चित्त, राष्ट्रमित्र, राजतंत्र-सारथी

सुनीति-योग, राष्ट्रधर्म, राज-हित के पारखी


माँ भारती निज कोख के, दैदीप्यमान पार्थ की

शुभ आरती उतारती, स्वयंप्रभा सुभारती


प्रबल अधिक, अटल पथिक, प्रतिमूर्ति निः स्वार्थ की

ललाट, शौर्य, गिरि समक्ष, हर दृष्टि है निहारती


माँ भारती निज कोख के दैदीप्यमान पार्थ की

शुभ आरती उतारती, स्वयंप्रभा सुभारती


कमल-कंठ, कर-कमल, माँ शारदा सँवारती

युग पुरुष के पाँव आज, श्रृष्टि है पखारती


माँ भारती निज कोख के दैदीप्यमान पार्थ की

शुभ आरती उतारती, स्वयंप्रभा सुभारती


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational