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निशान्त मिश्र

Inspirational Children

4.0  

निशान्त मिश्र

Inspirational Children

दिव्यांग सैनिक की व्यथा

दिव्यांग सैनिक की व्यथा

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कहो मातु मैं कैसे सोऊँ 

लांघ हिमालय की छाती को

आ पहुंचा रिपु सीमा पर

अरि के ऐसे दुस्साहस पर

कैसे धैर्य संजोऊं ?


कहो मातु मैं कैसे सोऊँ ?


पग - पग आगे बढ़ता आता 

पुण्य भूमि रज दलता जाता 

स्वर्ण मुकुट पर आँख गड़ाता 

रिपु उर शूल मैं बोऊँ !


कहो मातु मैं कैसे सोऊँ ?


माना असंख्य प्रहरी होंगे 

रत्नाकर के लहरी होंगे 

मातृभूमि पर मिटने का 

स्वर्णिम अवसर खोऊँ ?


या अपनी किस्मत पर रोऊँ ?

कहो मातु मैं कैसे सोऊँ ??


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