End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

पुल

पुल

1 min 416 1 min 416

गिरा था एक हिस्सा पुल का

हिस्से में दब गया जहाँ उसका


अनुस्नातक में स्वर्ण पदक जीती थी

वो पदवी आज तुम पे चीखी थी 


अपनों की जान की अज़मत नहीं जानते थे

ये लोग तो बस अपना क्लाइंट ढूंढने आये थे


शहर में एक नया पुल जो बनेगा

लोगो को लूटने का बहाना मिलेगा


सरकारी अधिकारी जाँच समिति बिठाएंगे

सारे उत्तराधिकारी निर्दोष पाए जाएंगे


फ़िर उस पुल का टेंडर दोबारा निकाला जाएगा

स्वाभिमान को बचाने का ढोंग किया जाएगा


चर्चा की शुरुआत बड़े बे ढंग तरीके से हुई थी

इंसान से पहले तकनीक को तवज़्ज़ो दी थी


जान माल के नुकसान की कोई बात नहीं हुई थी

टूटे हुए ब्रिज के काम को पाने की कोशिश हुई थी


न कोई खलिश न चहरे पे कोई मातम था

लगता है उन्होंने कोई अपना नहीं गवाया था


Rate this content
Log in

More hindi poem from Pathik Tank

Similar hindi poem from Tragedy