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सोनी गुप्ता

Romance

4  

सोनी गुप्ता

Romance

पुकारता है दिल

पुकारता है दिल

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नदियों सी निश्छल बहती हुई वो मीठी प्यास हो तुम, 

जिसको पाने की तलाश कर रहे हम वो आस हो तुम, 


कभी- कभी आकाश का वो विस्तृत रूप लगती हो , 

पुकारता है दिल तुम्हें लगता यहीं आस पास हो तुम


तुम्हें पाकर जैसे लगा अब तो मेरी तकदीर बदल गई, 

तप्त से मरुस्थल में बारिश की फुहार लगती हो तुम, 


शीतल सी शांत नदियों का वो कल- कल बहता पानी, 

मेरे हर सुंदर सपनों और मीठी यादों की तस्वीर हो तुम, 


हमारा घरौंदा जो आज भी तुमसे ही सुशोभित होता है,

 कभी हो जाए अंधेरा तो जुगनुओं सी चमकती हो तुम, 


आज इन आंखों से ओझल हो जाने कहाँ छिप गए हो, 

पुकारता है ये मेरा बेताब दिल बस अब लौट आओ तुम!! 


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