प्रियतम
प्रियतम
बहुत दूर निकल आई हूं तुम्हारे साथ
इस बार
बहुत करीब हो गई हूं तुम्हारे साथ
इस बार
आ जाओ करीब बहुत करीब
एक बार
रिश्ता तोड़ना चाहा तुम्हारे साथ
कई बार
क्योंकि बंधे हो रिश्ते में किसी के साथ
फेरे में
नहीं बंध सकती कभी भी तुम्हारे साथ
फेरे में
तन मन आत्मा से दे दू तेरा साथ
बिन सिंदूर रख ले प्रियतम अपने साथ
हम तेरे है
दिल को साक्षी मान कर साथ
आ जा मेरे हमसफ़र

