STORYMIRROR

Dr.Rashmi Khare"neer"

Others

3  

Dr.Rashmi Khare"neer"

Others

विरह वेदना

विरह वेदना

1 min
408

रंगों में रंग छुप गया

मेरा प्रिय मुझसे

बिछड़ गया

ना जाने कौन से

ओट में

मेरा हमसफ़र बहुत

दूर चला गया


फागुन मेरा विरह

वेदना बन गया

बिन रंगी मैं फागुन

निकल गया

ना जाने मैं कैसी

बुत बन खड़ी हूं

रंग मुझे ना

कोई रंग पाया


अब तो रंगों ने

रंगों से पूछा

लग जाऊं तुम्हें

मुझसे भी पूछा

कुछ बोल ना पाई

मैं अब

आँखो में डर

दर्द सब है


क्या करिएगा "नीर"

रंग बिना दुनिया नहीं

कौन सा रंग लूं मैं पिया

तेरे बिन रश्मि मैं

सतरंगी नहीं



Rate this content
Log in