STORYMIRROR

वैशाली सिंह

Classics Inspirational

4  

वैशाली सिंह

Classics Inspirational

प्रेम

प्रेम

1 min
423

प्रेम है ऐसी अभिव्यक्ति 

प्रेम में है बहुत शक्ति 

प्रेम है एक अद्भुत एहसास 

जो ले आए दो दिलों को पास।


प्रेम की न कोई परिभाषा 

प्रेम से जी उठे हर आशा 

प्रेम से सींचे पौधे में कली खिल जाए 

प्रेम से पूजो तो पत्थर भी भगवान बन जाए।


प्रेम है एक सुन्दर विचार 

प्रेममयी हो हर व्यवहार

प्रेम से मिट जाए दूरी 

प्रेम बिना हर कहानी अधूरी।


प्रेम में ही रखो आस्था 

प्रेम से कट जाए हर कठिन रास्ता 

प्रेम में पी गई विष का प्याला 

प्रेम की पुकार सुुन आया बंसी वाला।


प्रेम में हो जाओ सराबोर 

प्रेममयी होगा हर छोर 

प्रेम से हो घृणा का संहार 

प्रेम में जिये सारा संसार।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics