अहसास
अहसास
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हो रही तीखी दुपहरी
शाम का सूरज है निकला
बह रही है मंद पवन
याद आ रहा है कुछ पिछला।
वो सुबह सवेरे उठ जाना
वो तेरा मुझसे रूठ जाना
वो हंसना और मनाना
कुछ दिल की बातें कर जाना।
वो कैसी दुनियादारी थी
हमारी सबसे चर्चित यारी थी
वो बातें कितनी प्यारी थी
वो खिलखिलाती फुलवारी थी।
एक खूबसूरत एहसास था
कोई जैसे अपना पास था
वो ठंडी बारिश की बूंदें
महसूस करूँ आंखें मूँदे।
