STORYMIRROR

वैशाली सिंह

Others

3  

वैशाली सिंह

Others

अहसास

अहसास

1 min
159

हो रही तीखी दुपहरी 

शाम का सूरज है निकला 

बह रही है मंद पवन 

याद आ रहा है कुछ पिछला।


वो सुबह सवेरे उठ जाना 

वो तेरा मुझसे रूठ जाना 

वो हंसना और मनाना 

कुछ दिल की बातें कर जाना।


वो कैसी दुनियादारी थी 

हमारी सबसे चर्चित यारी थी 

वो बातें कितनी प्यारी थी 

वो खिलखिलाती फुलवारी थी।

 

एक खूबसूरत एहसास था 

कोई जैसे अपना पास था 

वो ठंडी बारिश की बूंदें 

महसूस करूँ आंखें मूँदे।


Rate this content
Log in