STORYMIRROR

Yogita Sahu

Tragedy

2  

Yogita Sahu

Tragedy

प्लास्टिक

प्लास्टिक

1 min
65

आज एक मानव दूसरे मानव से 

            लड़ झगड़ कर जी रहा ।

प्लास्टिक की उपयोगिता 

            आज दिनों दिन है बढ़ रही।।

आज पूरी कायनात 

          विषैली गैसों से घिर रही।

प्लास्टिकों के जंजीरों ने

            दुनियां को है ढक रहा।।

बदल रहा इंसान है

           बदल रही है उसकी सोच।

काम पैसे की लागत है 

       यही कारण है प्लास्टिक की अधिक उपयोग।।

किस किस को तुम रुकोगे

            दुनियां जिद्द में चल रही।

आज हमारी पृथ्वी 

            प्लास्टिकों से डूब रही।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy