पीत वसन वनमाली
पीत वसन वनमाली
आयी नवेली वसन्त ऋतु
धरती ने नव शृंगार किया।
पीले सरसों फूल खिले ,
धरा ने पीला शृंगार किया।
सरसों की ओढ़ी पीली चुनरी,
अमलतास के झुमके पहने।
कनेर पुष्प कुन्तल में सजे,
गेंदे का पुष्पहार सजा है।
वासन्ती रंग की बहार
पूजा में पीत परिधानों में,
पीले पुष्प वाणी वन्दना में,
पीली बूँदी मिले प्रसादी में।
केसर सुवासित पीत ओदन का
भोग लगे पीतवसन वनमाली को,
नटवर मुरली के बजैया को,
गिरिधर धेनु के चरैया को।
सरस्वती पूजा की धूम मची,
होली के रंग गुलाल उड़े।
वसन्तोत्सव चहूँ ओर हुआ,
नृत्य गीत के बोल सजे।
