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Dr Jogender Singh(jogi)

Comedy

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Dr Jogender Singh(jogi)

Comedy

फूफा

फूफा

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एक दिन दूल्हा बन आया था मैं,

सब के दिलों पर छाया था मैं

सालियों का दुलारा

सास ससुर का प्यारा।

कैसा तन के चलता था ,

छप्पन का हो जाता , बयालीस का सीना।

मेरे पीछे दौड़ा करती स्वीटी , रीता और रीना।

नए लड़के अब आए ,

मेरी कुर्सी ऐसी हिलाए।

ना सासू पूछे न साली,

समझती कुछ भी नहीं अब घरवाली।

इन लड़कों ने ऐसा चक्कर चलाया,

खुद बन गए जीजा , मुझ को फूफा बनाया।

अब मुंह फुलाए घूम घूम सब को बताता हूं,

देखो भई फूला मुंह मेरा,

इसलिए फूफा कहलाता हूं।


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