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अनामिका वैश्य आईना Anamika Vaish Aina

Romance Others

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अनामिका वैश्य आईना Anamika Vaish Aina

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फूल खिले मन आँगन के

फूल खिले मन आँगन के

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फूल खिले मन आंगन में महका सारा संसार

आओ साजन कुछ लम्हे कर ले थोड़ा प्यार.. 


वक़्त के तूफ़ां में बिखरे बिलख रहे ज़ज्बात 

सानिध्य में तेरे सजना कर लेंगे साज-श्रृंगार..


ख़ुद में ही क़ैदी सी सिमटी रहती हूँ मैं प्रिये 

नेह से अपने संवार कर करना मेरा विस्तार.. 


मैं जोगिन अनजानी बावरी समझाना मुझे 

रोम रोम में बसकर करना प्रिय प्रेम-संचार.. 


केशों जैसी उलझी रहती तुम सुलझा देना 

तेरे प्यार के लोशन से मिलता मुझे करार.. 


साकार हो कुछ सपने तो जीवन ये महके 

बसंत बन कर आओ मैं करूं तेरा आभार.. 


बातों से बहका लेना साँसों में बस जाना 

धीरे-धीरे मुझपर कर लेना तुम अधिकार..



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