पेंटिंग बाय अननोन (प्रोंम्पट19
पेंटिंग बाय अननोन (प्रोंम्पट19
बुढ़ापा एक धीमा जहर
सौ तरह के टूट जाते हैं कहर
समझ कुछ आता नहीं
अंग कोई चल पाता नहीं
धीरे-धीरे सुन्न होते दिमाग में भी
बढ़ते जाते हैं वहम।
माया मोह छूटता नहीं,
कहीं भी मन लगता नहीं,
बच्चे भी घबरा जाते हैं,
सब कुछ उनकी कहां सुन पाते हैं?
उनके कुछ भी बोलने के डर से
अपनी बदनामी की फिक्र से ,
यूं ही यहां वहां मुंह छुपाते हैं,
अधिकतर बुढ़ापा ऐसा ही होता है ना?
जरूरी नहीं कि सबका बुढ़ापा ऐसा हो।
कुछ मीरा से भक्त तो जहर को अमृत बना लेते हैं।
लेकर हाथ में माला, मगन होकर अपने गुरु के भजनों में,
अपने दर्द को भी हरा देते हैं।
शांत चित्त रख, हृदय में प्रभु की मूरत रख,
औरों के द्वारा की गई सब गलतियों को भी क्षमा करते हैं।
लेकर प्रभु का नाम वह प्रभु में ही रमा करते हैं।
बुढ़ापे का समय बन जाता है उनके लिए निश्चिंत प्रभु से मिलन का प्रणय काल।
मरणोपरांत भी वह अपने प्रभु से मिलने के लिए जिया करते है
