पौराणिकी
पौराणिकी
मिथकों का अध्ययन हो या हो,
संस्कृत पुराणों से जुड़ी प्राचीन काल की कहानियांँ।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
हमारे कान्हा के जन्म की कहानी हो या
उनके अवतारों की हो कथा।
कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की कहानी हो या
उनकी राधा संग प्रेम की हो कथा।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
राम जी और लक्ष्मण जी के भाईचारे की कहानी हो या
माता सीता की व्यथा की हो कथा।
हनुमान जी के स्वर्ण लंका में,
आग लगा देने की कहानी हो या
रावण के भाई विभीषण को,
‘घर का भेदी’ कहे जाने की हो कथा।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
कौरवों और पांडवों के बीच के,
मतभेदों और मनभेदों की कहानी हो या
द्रौपदी के चीरहरण की हो कथा।
कर्णसंगिनी उर्वी की कहानी हो या
पूर्ण महाभारत की हो कथा।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
सुर और असुरों द्वारा मिलकर किए गए,
समुद्र-मंथन की कहानी हो या
शिव-शंभू द्वारा नंदी पर किए गए क्रोध की हो कथा।
पक्षीराज गरुड़ के अपनी माता विनता को,
अपनी विमाता कद्रू की दासता से,
मुक्त कराने की कहानी हो या
रावण को नंदी के द्वारा मिले श्राप की हो कथा।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
जनमेजय का “सर्प मेघ यज्ञ” हो या
धृतराष्ट्र का पुत्र मोह।
भस्मासुर को शिव का,
वरदान मिलने की कहानी हो या
दानवीर कर्ण की कथा।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
भगवान विष्णु जी के,
सुदर्शन चक्र को प्राप्त करने की कहानी हो या
भगवान परशुराम के,
अपनी ही मांँ का सिर काटने की हो कथा।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
गुरु द्रोणाचार्य एवं,
उनके शिष्य अर्जुन की कहानी हो या
पक्षीराज गरुड़ के भगवान विष्णु से,
सलाह की बजाय साथ मांँगने की हो कथा।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
उर्मिला और लक्ष्मण के प्रेम की कहानी हो या
शकुंतला और दुष्यंत के,
पहली नज़र के प्रेम की हो कथा।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
कितनी है हमारी पौराणिक कहानियांँ ?
गिन पाना तो है थोड़ा असंभव सा।
इस एक कविता में समेटूँ कैसे ?
हर एक पौराणिक कथा।
इतनी-सी ही है बस इस लेखिका की व्यथा।
क्योंकि लिख दूंँ चाहे जितना भी पर,
फिर भी छूट ही जाएगी शायद,
कोई ना कोई पौराणिक कथा।
मिथकों का अध्ययन हो या हो,
संस्कृत पुराणों से जुड़ी प्राचीन काल की कहानियांँ।
सब कुछ तो है वही,
जिसे पौराणिकी कहा गया।
