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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance

नवरंग होली

नवरंग होली

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रंगो से भरी होली आई,

नव रंगो का बरसात लाई,

अबीर गुलाल उड़ रहा आसमान में, 

सब के उपर फररर फररर।


मधुर मिलन की पल लाई, 

बरसों के विरह का अंत लाई,

प्रियतमा ने रंग की भरी पिचकारी, 

प्रियतम पर उड़ाई सररर सररर।


रंग उड़ा है दिल के प्यार से, 

हो गया प्रियतम तरबतर तररर,

प्रियतमाको देखकर बोला प्रियतम, 

बस कर अब तू अररर अररर।


यह सुन मस्ती से प्रियतमा नाची,

 ता थे त त थे थननन थननन,

मुधर नाद से पायल बाजी , 

छुम छननननन छुम छननननन।


प्रियतमने गाया प्यार का तराना,

 दिम दिम तननन दिम दिम तननन,

प्रियतमने छेड़ी मधुर "मुरली", 

सारेगरे सारेग गमपधनिनिसां.


माहौल बन गया नवरंगो का, 

दिल के उमंग से भररर भररर, 

होली उत्सव में दोनों झूमे, 

रुनक झूनक झूम झननन झननन।



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