STORYMIRROR

shweta mishra

Tragedy

4  

shweta mishra

Tragedy

नुमाइश

नुमाइश

1 min
433

यूं बंद कमरे में

मुझसे इश्क़ जताना

जिस्मों के खेल को

इश्क़ का पहलू बताना

क्या यही प्यार है ?


सुना था कभी

इश्क़ कुछ रेशमी लाल

कुछ महताब की चाँदी सा

कुछ गुण सा

कुछ नमक सा

मिश्रण होता है।


मगर असराऱ ए इश्क़

तुमने गिनाए

मन भ्रमित सा है अब।


यूं समाज में

अनदेखी करना

खुद को मेरे सामने

अजनबी सा रहना

और देख एकांत मेरी

कलाई मरोड़ना


प्रेम उमड़ना और

यूं मेरे जिस्म और लब पर

तेरे निशां छोड़ जाना

क्या यही प्यार है ?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy