STORYMIRROR

shweta mishra

Abstract

4  

shweta mishra

Abstract

साँझ

साँझ

1 min
540

साँझ

रंगों का संगीत

विरह लाल

नयी धुन

हर साँझ

एक पूरा दिन देकर

जाती है।


अपने आगे भी और पीछे भी

पीछे का दिन

समेटता है

हर काम और अंजाम

चूल्हे की धधक से लेकर

गोधुलि की,


साफ लीक तक का

और आगे का दिन

इंतजार करता है

खुद में होने वाले चौपालों सा

जीवन के कदम ताल का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract