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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Tragedy Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Tragedy Inspirational

मेरे देश की धरती

मेरे देश की धरती

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ये चंद पंक्तियां प्रवासियों को ही लक्ष्य कर लिखी हैं


मेरे देश की धरती करे पुकार आजा मेरे राजकुमार। 

जिसका अन्न खाकर पले बढ़े, जिसकी नदियों संग हिले मिले ।


बाग बगीचे वन निर्जन , संगी साथी, घर आंगन तेरी राह तके ।

रोती गय्या, रोती मैय्या, अब तो बहना के भी नयन थके ।


कब तक तू इस मृगमारीचिका के पीछे-पीछे भागेगा ।

आयेगी जब कोई विभीषिका तभी क्या तू फिर से जागेगा ??? 


मेरे देश की धरती करे पुकार आजा मेरे राजकुमार। 



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