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Devendraa Kumar mishra

Abstract

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Devendraa Kumar mishra

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नर्क का द्वार

नर्क का द्वार

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नर्क का द्वार कहते हैं जिसे 

उसी नर्क से निकलते हैं 

उसी को पाने प्रणय निवेदन करते हैं 

विवाह करते हैं 

हिंसक और विकृत हुए तो

उसी नर्क के साथ बलात्कार करते हैं 


यदि नर्क हैं स्त्रियां तो क्यों आपने अपने इर्द गिर्द

नरकों को शिष्या बनाकर सेवा में लगाया हुआ है 

नर्क के बिना आपका भी काम नहीं चलता 

स्वर्ग को नर्क कहकर स्वर्गिक आनंद उठा रहे हो,

वैध अवैध तरीके से 

और हमें भयभीत करके बेघर, अकेला करके 

ध्यान, योग की बातें करते हैं 


सच तो ये है कि आप जानते है कि

जिसे आप नर्क कहकर झुठला रहे हैं 

वही धरती का स्वर्ग है 

यदि नर्क का द्वार है नारी,

तो क्यों सारी दुनियां और आप तो कुछ ज्यादा ही

नर्क के पीछे उतावले, मत वाले होकर घूम रहे हैं 


क्योंकि आप जानते हैं कि आप झूठ कह रहे हैं,

स्वर्ग को नर्क कहकर।


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