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Arunima Bahadur

Action

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Arunima Bahadur

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नमन मातृभूमि

नमन मातृभूमि

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पावन रज इस वसुधा की,

जहाँ वीर सपूत ही आते हैं,

कुछ बन वीर जवान,

कुछ बन अन्नदाता किसान,


धरती का मान बढ़ाते हैं,

कर तिलक पवन रज का,

दोनो मस्त मस्त से चलते हैं,

एक सींचे लहु से धरती,


दूजा पसीने से सींचे हैं,

दोनो के संकल्प अनोखे,

सेवा वसुधा की करते है,

कर्ज चुकाकर मातृभूमि का,


तनिक अभिमान न करते हैं,

जब जब आता संकट माँ पर,

बलिदान सर्वस्व ही करते हैं,

धन्य हैं दोनो की माँ,


त्याग, सेवा सिखलाती हैं,

देशभूमि पर हो न्योछावर,

हर पल वो सिखलाती हैं,

धन्य ही है वह मातृभूमि,

जहाँ ऐसे बलिदानी होते हैं,


नमन तुझे हे मातृभूमि,

बारम्बार करते हैं।।


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