STORYMIRROR

S Ram Verma

Romance

3  

S Ram Verma

Romance

नियत और नियति !

नियत और नियति !

1 min
1.7K


कभी सिहरता 

कभी महकता 

कभी तपता 

कभी भींगता 

कभी स्वतः यूँ ही 

पिघलता और मैं 

यूँ भी आनंदित था 

पर विचलित ना था 

जानता था कि ये  

तुम्हारी नीयत न थी 

नियति के चक्र में 

तुम भी बंधी थी

पर दुख तो ये था 

कि तुम ये भूल गयी थी  

कि तुम्हारे चक्र में मैं 

भी तो बंधा था !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance