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सीमा भाटिया

Drama

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सीमा भाटिया

Drama

मुसाफिर

मुसाफिर

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मुसाफिर है तू इस इक अनंत सफर का

चलते रहने का नाम जिसका जिंदगी।


वक्त ही तो नहीं मिलता यहाँ किसी को

नेक कर्मों से अपने कर खुदा की बंदगी।


तेरी मेरी के अँधेरे में खो न जाए ओ बंदे

राहे रोशनाई से मिटा दे दिलों की तिश्नगी।


यह जो "मैं" का बंधन घेरे है तेरे मन को

काट देगा, तभी तो पा सकेगा नुमायंदगी।


कुछ न जाना साथ तेरे इस जहाँ से सोच ले

खाली आया, खाली ही होगी अब रवानगी।


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