मुझे कोई लिखने लगा है
मुझे कोई लिखने लगा है
मुझे अपनी गजलों के शब्दों में ही कोई लिखने लगा है,
उस शख्स को मुझमें ऐसा क्या खास दिखने लगा है।
निभाने की हिम्मत रखते हैं सच्ची मोहब्बत करने वाले
दिखावटी दिल तो अब हर जगह जैसे बिकने लगा है।
फूलो के साथ सदा होते हैं ये कांटे उनकी रखवाली में,
जैसे फूलो का दिल भी कांटों की ओर झुकने लगा है
ख्वाब के पीछे भागती रही समझ अपनी हकीकत,
वो ख्वाब ही हकीकत में क्यों खंजर सा चुभने लगा है ।

