मत पीटो
मत पीटो
लाठी से मत पीटो, हम पशु नहीं हैं
कुछ मांगे हैं हमारी, अपनी सरकार से
अनशन पर बैठे हैं हम भूखे प्यासे दिन चार से
हक ही तो मांग रहे हैं, नारों के नक्कार से
मत घसीटो, मत मारो
तेज पानी की बौछार से
पानी उनको दो जो मर रहे हैं प्यास से
हम तो कहना चाहते हैं बस बहरी सरकार से
बढती मंहगाई की ज्वाला
भ्रष्ट प्रशासन हुआ काला
रुपये का निकलता जाए दिवाला
रोटी, कपड़ा और मकान
दे दो जीवन के तीन निशान
मौलिक अधिकार है हमारा
राष्ट्र के नागरिक हैं हम
अपने जीवन की मांग गलत नहीं है
मत खदेडो, कुत्ता नहीं हैं
ऐसे कैद मत करो
जनता हैं, मुर्गा नहीं हैं
उठा कर मत फेंको
मुर्दा नहीं हैं।
