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मन को जब कोई भा गया

मन को जब कोई भा गया

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मन को जब कोई भा गया

दिल को थोड़ा करार आ गया।


अनजान थी वो मेरे प्यार से

इकतरफा प्यार मैं करता गया।


उसकी तस्वीरों से मैं बातें करता

ये भी हुनर मुझमें आ गया।


देखा जब उसे करीब से , तो लगा

जैसे चाँद उतर कर ज़मीन पर आ गया।


उसकी जुल्फें,उसकी नज़रें सब क़यामत थी

जब देखा, तो बस उसे देखता हीं रह गया।


जब गुफ्तगू करने की बात आई

थोड़ा सा मैं भी शर्मा गया।


इज़हार -ए - इश्क़ जब किया उससे

तो खिलता हुआ फूल मुरझा गया।


आँखों से उतर कर उसके दिल तक जाना था

दिल तो छोड़िये,उसकी आँखों से भी उतर गया।


अरसे बाद एक दिल में आस जगी थी

आस तो टुटा,दिल का दर्द भी बढ़ गया।


दिल पहले भी तन्हा ही था

दिल आज भी तन्हा ही रह गया।।


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