STORYMIRROR

Komal Kamble

Tragedy

4  

Komal Kamble

Tragedy

मझधार जिंदगी की

मझधार जिंदगी की

1 min
240

जीवन के आसमान में

दुखों के घिरे हैं बादल

जिंदगी की मेरी मझधार

रूकी हुई है किनारे पर


टूटे हौसलों के सागर में

मेरी आशाएं डूब रही

अश्कों के पानी में

सांसें उनकी घुट रही


अरमानों के चंचल परिंदे

गमों के बादलों के पार

उड़ने की ख्वाइश उनकी  

जीवन के उन बंधनों में जा फंसे हैं


खुशियों से भरे ख्वाब

अधूरे ही रह गए

टूटे गमों के वो बादल

जिंदगी की मझधार पर जो जा गिरे!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy