STORYMIRROR

Komal Kamble

Tragedy

4  

Komal Kamble

Tragedy

एक सवाल

एक सवाल

1 min
221

एक सवाल मेरा इस समाज से कि

क्या मेरी गलती है

तन तो है पुरुष का

पर मन मेरा है औरत का

चाह मेरी इस बदलाव में ढलने की

फिर मेरे इस फैसले क्यों है एतराज तुम्हें?

चाहे मेरा मन जो

वो करना है मुझे

ईश्वर की इस देन को

तुम क्यों घिन समझते हो?

अपना नाम होकर भी मैं किन्नर हूं

पहचान अपनी होकर भी मैं किन्नर हूं

नाम पहचान होकर भी मुझे किन्नर ही क्यों कहते हो?

क्या दोष है मेरा?

क्या तुम बतला सकते हो?

पर मुझे न दिखता दोष मुुझमें

तुम्हें न दिखती हो खुबसूरती मुुझमेंं

क्योकिं तुम खुबसूरती की परिभाषा से परे हो

फिर भी है मेरा सवाल तुुुमसे

क्या तुम इसका जवाब दे सकते हो??



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy