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Vishnu Saboo

Tragedy Inspirational

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Vishnu Saboo

Tragedy Inspirational

मजबूरी

मजबूरी

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आती है गुब्बारे वाले बुढ़िया ।

जिसे देख बच्चे मचल जाते हैं ।।

पर बच्चों के माता-पिता डर से।

महामारी के कुछ नहीं खरीद पाते हैं ।।


मायूस सा चेहरा लेकर वो ।

आज भी बिना बेचे घर चली आयी ।।

कैसे भरेगी पेट अपना वो ।

चिंता की लकीरें मुख पर उभर आई ।।


खुला है बाज़ार आज अरसे से ।

शायद आज कुछ माल बिक जाए ।।

वो भरकर पानी-पूरी का खोमचा चला ।

की शायद आज बच्चों का पेट भर सके ।।


उम्मीद का दीया लेकर वो ।

सुबह से शाम तक बैठा रहा ।।

हाईजीन के नाम पर लेकिन ।

बहुत ही कम माल बिका ।।


नीम के नीचे बाल संवारा करता है वो।

पर अब उतने लोग नहीं आते हैं ।।

सेनेटाइजर , मास्क और बाकी सब कुछ ।

रखा है इसने भी पर लोग बड़े सलून में जाते हैं ।।


जाने कब ये दहशत कम होगी ।

जाने कब हमारा भी काम चलेगा ।।

आखिर कब तक ऊपर वाला ।

ऊपर बैठकर हमारी परीक्षा लेगा ।।


जाने कितने ही ऐसे आशियाने ।

इस माहौल ने है खराब किया ।।

कितनों को बीमारी ने उजाड़ा ।

कितनों को भूख ने बेहाल किया ।।


कर सकें कुछ इन लोगों के लिए तो ।

मानवता पर ये बड़ा उपकार होगा ।।

वो भी जी लेंगे अपनी जिंदगी ।

दुआओं से उनकी अपना उद्धार होगा ।।



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