STORYMIRROR

LALIT MOHAN DASH

Romance

4  

LALIT MOHAN DASH

Romance

मिलन की आशा

मिलन की आशा

1 min
10


मुझे याद है कि तुमने 

विगत वर्ष मेरे घर आकर 

मुझे स्वदेश जाने हेतु 

विदा किया था और

इस वर्ष भी सबके सामने ही 

गले लगा कर 

विदा करने का

साहस भी किया था।

याद आते ही तुम्हारी 

आंखें छल- छला सी गई हैं

अपनी बेबसी और बेचैनी को

आशंकाओं के जंगलों में 

फंसा हुआ सोच कर ही 

पुनः मिलने की संभावनाओं से

निरुत्तर सा हो गया हूं

क्या कहूं कब संयोग होगा

और कब मिलन होगा 

यह सब अनिश्चित है 

लेकिन वियोग में ही सही 

तुम्हारी वाणी का सुख

मिलेगा ही यह मानकर

मैं चला हूं और फिर 

मिलने की कोई युक्ति 

परमेश्वर से मांग बैठा हूं।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance