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LALIT MOHAN DASH

Abstract Inspirational

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LALIT MOHAN DASH

Abstract Inspirational

अकेला बागबान

अकेला बागबान

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सूना सूना है पड़ा आंगन ये मेरा

छीना छीना सा है दिल जो मेरा

सूनी सूनी है लागे बगिया ये मेरी

छीनी छीनी सी है खुशियां जो मेरी


सूना सूना है पड़ा छत जो मेरा

खाली खाली सा है जीवन जो मेरा

सूनी सूनी है लागे बाते ये मेरी

छीनी छीनी सी है सौगातें जो मेरी


जीना जीना वो है कैसा ये मेरा

खाली खाली पन रह गया अकेला

उड़ उड़ गए जो पंछी यह डाल मेरा

कोठी कोठी करते रह गया अकेला


सूना सूना है पड़ा रातों का अंधेरा

छीनी छीनी सी ख्वाबों की दुनिया मेरी

सूनी सूनी सी है फूलों की डालियां मेरी

छीनी छीनी है कैसी बागबानी ये मेरी



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