STORYMIRROR

LALIT MOHAN DASH

Abstract Inspirational

4  

LALIT MOHAN DASH

Abstract Inspirational

अकेला बागबान

अकेला बागबान

1 min
20


सूना सूना है पड़ा आंगन ये मेरा

छीना छीना सा है दिल जो मेरा

सूनी सूनी है लागे बगिया ये मेरी

छीनी छीनी सी है खुशियां जो मेरी


सूना सूना है पड़ा छत जो मेरा

खाली खाली सा है जीवन जो मेरा

सूनी सूनी है लागे बाते ये मेरी

छीनी छीनी सी है सौगातें जो मेरी


जीना जीना वो है कैसा ये मेरा

खाली खाली पन रह गया अकेला

उड़ उड़ गए जो पंछी यह डाल मेरा

कोठी कोठी करते रह गया अकेला


सूना सूना है पड़ा रातों का अंधेरा

छीनी छीनी सी ख्वाबों की दुनिया मेरी

सूनी सूनी सी है फूलों की डालियां मेरी

छीनी छीनी है कैसी बागबानी ये मेरी



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract