STORYMIRROR

नम्रता सिंह नमी

Romance

3  

नम्रता सिंह नमी

Romance

महक

महक

1 min
216

जब भी तुम्हें सोचूँ

मेरी सोच में महकते हो


रंगीन तितलियों से ख्वाब में महकते हो

मेरे लिखे हर शब्द में महकते हो


हौले हौले मेरी साँसों में महकते हो

जब भी खनकती है मेरी चूड़ियां

उस खनखनाहट में महकते हो


पायल की रुनझुन और नैनो के कजरे में

तो कभी मेरे बहते अश्कों में


वो सतरंगी मुस्कान और तो कभी

मेरी छुअन में महकते हो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance