महक
महक
जब भी तुम्हें सोचूँ
मेरी सोच में महकते हो
रंगीन तितलियों से ख्वाब में महकते हो
मेरे लिखे हर शब्द में महकते हो
हौले हौले मेरी साँसों में महकते हो
जब भी खनकती है मेरी चूड़ियां
उस खनखनाहट में महकते हो
पायल की रुनझुन और नैनो के कजरे में
तो कभी मेरे बहते अश्कों में
वो सतरंगी मुस्कान और तो कभी
मेरी छुअन में महकते हो।

