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नम्रता सिंह नमी

Abstract

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नम्रता सिंह नमी

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मिठास

मिठास

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हाँ मैंने जिया है ज़िन्दगी को 

चखा है नमकीन

आंसुओं की मिठास को


टूटे ख्वाबों के उड़ते

परों को उड़ान भरते देखा है

बिखरते हौसले को

नज़रों में छुपाये रखा है


आँखों से बहते इन आंसुओं को

दिल का दर्द कम करते देखा है

हाँ मैंने जिया है ज़िन्दगी को

हर घड़ी हर पल जिंदगी जीती है

मुझ में और मैं ज़िन्दगी में।


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