STORYMIRROR

नम्रता सिंह नमी

Drama

3  

नम्रता सिंह नमी

Drama

बेतरतीब

बेतरतीब

1 min
160

कुछ बेतरतीब से खयाल

यूँ ही विचरते हैं


कभी तुम खयालों में हो

तो कभी ख्याल तुम में


यूँ ही गुजर जाती है

ना जाने कितनी रातें


और ख्याल बेसबब

तुम्हारा पीछा करके

तुम तक पहुंच जाती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from नम्रता सिंह नमी

Similar hindi poem from Drama