STORYMIRROR

नम्रता सिंह नमी

Tragedy

3  

नम्रता सिंह नमी

Tragedy

गुमनाम मौत

गुमनाम मौत

1 min
355


अंतिम यात्रा के लिए अब वो

चार कंधे भी जरूरी नहीं रहे

रोते बिलखते वो स्नेहीजन भी नहीं रहे।


कोरोना के इस दंश ने

सूनी कर दी इस यात्रा को

जाते वक्त नहीं रो पाए

तेरे चेहरे को चूम के

तेरे सीने से लिपट कर

मौत ऐसी भी अकेली होगी

सोचा न था।


तुम्हारे बिना मेरी ये यात्रा भी नहीं होगी

ये कहने वाले

आज बिना कुछ कहे सुने और इंतज़ार किये

चुपचाप चल दिये

मौत ऐसी सूनी होगी सोचा न था।


ज़िन्दगी भर ये अवसाद

नासूर बन चुभेगा...

जब तुम गए तो हम कहीं नहीं थे

मौत ऐसी भी सूनी होगी सोचा न था।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy