नम्रता सिंह नमी
Drama
कितनी अजीब भीड़ थी
हाथों में डंडा लिए
आक्रोश से भरे
चिल्लाते
एक साथ एक ही
दिशा में दौड़ते
और फिर क्या
लाठी की मार मार मार
और अलविदा सांसें।
मिठास
चाँद
लकीरे
भीड़
बेतरतीब
अनजाने कंधे
सांस
गुमनाम मौत
बंदी
भाव
मुझे खुशी होगी तब, जब इस देश से इन शत्रुओं का, नामोंनिशान मिटाकर, आराम से धरती की गोद में, मिट्टी मे... मुझे खुशी होगी तब, जब इस देश से इन शत्रुओं का, नामोंनिशान मिटाकर, आराम से धरती क...
आतंकवादियों द्वारा हमला किया जा रहा है। जो धर्म के नाम पर मारते और नष्ट करते हैं। आतंकवादियों द्वारा हमला किया जा रहा है। जो धर्म के नाम पर मारते और नष्ट करते...
जीवन का दर्शन कराती यह कविता मनुष्य को उसके अस्तित्व के बार में बताती है । जीवन का दर्शन कराती यह कविता मनुष्य को उसके अस्तित्व के बार में बताती है ।
कितनी बार ? वही पुरानी बात वही हालात कहूँ मैं... कितनी बार ? वही पुरानी बात वही हालात कहूँ मैं...
फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ? फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ?
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
छंदमुक्त कविता...! छंदमुक्त कविता...!
एकांत में भी हिन्दी को अपने पास ही पाया... एकांत में भी हिन्दी को अपने पास ही पाया...
ये 'बाबुल' सदा तेरे साथ है, जब-जब याद करेगी, अपने आस-पास ही पाएगी... ये 'बाबुल' सदा तेरे साथ है, जब-जब याद करेगी, अपने आस-पास ही पाएगी...
अब डर नहीं लगता, किसी के दूर जाने का, अब दिल नहीं करता, किसी से जुड़ जाने का...! अब डर नहीं लगता, किसी के दूर जाने का, अब दिल नहीं करता, किसी से जुड़ जाने का...!
देख-ए-इंसान, तेरे देश का हाल क्यूँ बदहाल है... देख-ए-इंसान, तेरे देश का हाल क्यूँ बदहाल है...
मैं शब्दों की दुनिया में आया हूँ मनुष्य जाति की ओर से उनका शुक्रिया अदा करने। मैं शब्दों की दुनिया में आया हूँ मनुष्य जाति की ओर से उनका शुक्रिया अदा करने।
हाँँ ! वो उड़ना चाहती है उड़ना चाहती है गिरना चाहती है गिरकर उठना चाहती है पर वो रुकना नही चाहती, बस व... हाँँ ! वो उड़ना चाहती है उड़ना चाहती है गिरना चाहती है गिरकर उठना चाहती है पर वो र...
मतदान का फिर क्या होगा? आपका एक वोट वहां कम न होगा ? मतदान का फिर क्या होगा? आपका एक वोट वहां कम न होगा ?
रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ
वह भोर के तारे से अधिक गोरा, और चन्द्रमा से भी अधिक सफेद है, वह भोर के तारे से अधिक गोरा, और चन्द्रमा से भी अधिक सफेद है,
इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है, इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है,
दर्द दबाकर रखा है दफन सीने में और उन्हें कराह भी करना तक नहीं. दर्द दबाकर रखा है दफन सीने में और उन्हें कराह भी करना तक नहीं.
मैंने इंसान की जान को कुछ रुपयों में बिकता देखा है मैंने एक हसीन ज़माने को तहस नहस होता देखा है...... मैंने इंसान की जान को कुछ रुपयों में बिकता देखा है मैंने एक हसीन ज़माने को तहस...