मगर हालात बदले नहीं
मगर हालात बदले नहीं
कभी ख़ामोश तो कभी रहे मौन
हम रूठ जायें तो मनाएगा कौन
सुना है तुम आये हो हमारे शहर
मगर नहीं है हमको इसकी खबर
इश्क़ में अंदाज़ बदले मगर जज़्बात बदले नहीं
सब कुछ तो बदल गया मगर हालात बदले नहीं
जाने क्यूँ रहते हो तुम हमसे खफा
हमें मिली सजा करके तुमसे वफ़ा
इश्क़ तो किया मगर जताया नहीं
दिल धड़कता है मगर बताया नहीं
बदले मौसम के साथ तुम्हारे खयालात बदले नहीं
गिर कर संभल गए थे हम मगर हालात बदले नहीं
आज भी वहीं खड़े हैं जहाँ कल थे
बेकरारी के वह कितने सुहाने पल थे
जाड़ों में नरम धूप अब चहकती नहीं
इश्क़ की खुशबु अब महकती नहीं
ज़िन्दगी के बारे में तुम्हारे सवालात बदले नहीं
हवाओं का रुख बदला मगर हालात बदले नहीं।

