मेरी पहली प्रेम कहानी
मेरी पहली प्रेम कहानी
एक हसीन दस्तान जो भवर सी गुजरी थी,
बस से उतर कर किसी के इंतेज़ार मे वो ठहरी थी,
एक झलक ही देख उसे ये दिल मचला था,
मानो मोहब्बत में उसके कूद जाने का पूरा हौसला था,
हर पल में उसका दीदार गहरा होता गया मेरी चाहत की पहल भी कमाल थी,
वो दूर दूर अक्सर रहती मुझसे फ़िर भी लगता बेइन्तहा मेरे पास थी,
फ़िर ऐसा हुआ हाल ए दिल बयां करने को बेकरार थे,
आँखो मे खुशी दिल में सुकून और होठों पर इजहार थे,
नादान सी हंसी लिये उससे बेखौफ गुफ़्तगू कर लिए,
कितनी मासुमीयत से समझ रही थी वो जज्बात मेरी,
सुरमई सी मुस्कान के साथ वो रजामंद हुए,
इश्क़ मे उनके सजदे ऐसे किये हमने आदते ही नहीं इबादत भी बदल गयी,
एक कशिश मे बंधा रहता था उसका प्यार पाकर यकीन हुआ वो खुदा कितना अच्छा था,
कहाँ मालूम था पल में ज़िंदगी बदलने वाली थी,
हजारों एहसासों को ओढ़े वो मेरी पहली प्रेम कहानी थी ।

