मेरी नन्ही चार्वी
मेरी नन्ही चार्वी
रूप सलोना रंग गुलाबी,
कैसी मोहक मूरत है,
कितने कोमल अंग तुम्हारे,
कितनी प्यारी सूरत है,
एक तुम्हारी किलकारी में,
दुनिया का सुख वार दिया,
जो तुमने अंगुली को थामा,
सब कष्ट दुखों से तार दिया,
नन्हे-नन्हे हाथ गुलाबी,
पंखुड़ी जैसे लगते हैं,
तेरे छोटे छोटे पैरों में,
मेरे सातों जीवन रहते हैं,
पहली बार जो खोल ये आंखें,
तुमने मुझको देखा था,
सच कहती हूँ मेरी गुड़िया,
कि स्वर्ग भी उस क्षण फीका था,
क्या कविता मैं तुम पर लिख दूं,
सब शब्द भी कम से लगते हैं,
मेरी कलम के सारे अक्षर ,
तुम पर कोरे लगते हैं,
मन्द-मन्द मुस्कान तुम्हारी,
जीवन का सुख देती है,
तेरी एक झलक ही मेरी सारी,
तकलीफें हर लेती है,
मैं दुनिया की सारी दौलत,
तेरी मुस्कान पर कुर्बान करूं,
बस तुझे देखकर ही मैं अब,
मेरे जीवन का आगाज़ करूं,
तेरे कोमल होठों की,
मुस्कान सदा ही बनी रहे,
भगवान करे तेरे जीवन में,
खुशियां ही हर पल सजी रहें।
