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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Tragedy

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Tragedy

मेरी कामयाबी

मेरी कामयाबी

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जैसे-जैसे दुनिया मे आगे बढ़ते गये 

वैसे-वैसे दुनिया से हम तो कटते गये

जैसे हम ऊंचाइयों की ओर बढ़ते गये

पीछे रस्ते से हमारे निशान मिटते गये


वो मीत हुए दूर, जो मानते हमे कोहिनूर

उनसे आगे क्या बढ़े, मित्र ही जलते गये

अब क्या दोष भला, हम उस इत्र को,

जो चंदन होने के कारण महकते गये


जो थे, मेरे अपने, वो कामयाबी पाते ही,

उनके साये मुझसे जाने क्यों डरते गये

जो थे रायचन्द, उनकी राय देना हुई, बंद

जैसे हुए सफल, दोस्त मेरे सिमटते गये


उन आईनो को क्या दोष देता, ये साखी

उनके अक्स वक्त के साथ बदलते गये

जितना ज्यादा बुलंदियों पर चढ़ते गये

उतना पीछे से अकेलेपन से लड़ते गये 


जो थे मेरी कामयाबी पर खुश होने वाले

माँ-बापू को देख, कुछ तो हम हंसते गये

यही तो मेरे दोस्त दुनिया की सच्चाई है

सफल नही होंगे, सब करेंगे जग हंसाई है


जितना ज्यादा जायेगा सफलता ऊंचाई है

उतना ही ज्यादा, अकेला होगा तू भाई है

क्योंकि तेरी खुशियों से उन्हें गम होगा,

क्योंकि हर जगह ईर्ष्या ने आग लगाई है


हम अपने पथ पर पर यूंही आगे बढ़ते गये

मां-बापू, दुआओं से शूलों बीच खिलते गये।


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