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Minal Aggarwal

Tragedy

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Minal Aggarwal

Tragedy

मेरी आंखों में आंसू भरे थे

मेरी आंखों में आंसू भरे थे

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मेरी आंखों में 

आंसू भरे थे और 

इतने भरे हुए थे कि 

उन्हें निचोड़ने के लिए 

मुझे किसी खाली जगह की 

तलाश थी 

मैं ऐसे स्थान को खोजने निकली 

मुझे सड़क के किनारे 

मिट्टी में सना एक कांच का टूटा 

गिलास मिला लेकिन 

वह इतना गंदा था कि 

उसे हाथ से छूने का भी मेरा मन नहीं 

हुआ 

फिर कुछ कदम चलने पर 

मुझे एक अधटूटा सा 

किसी धातु का एक बर्तन मिला 

उसमें एक दरार थी 

उसमें कुछ डालने पर 

वह रिस सकता था तो 

उसे भी मैं प्रयोग में नहीं ले 

सकती थी 

ऐसे ही चलते चलते मैं एक 

जंगल में प्रवेश कर गई 

वहां मुझे एक चटका हुआ घड़ा 

मिला लेकिन 

वह भी मेरे आंसुओं के बोझ को 

वहन करने में सक्षम नहीं था 

वहीं कहीं मुझे एक कुआं मिला 

पानी से लबालब भरा 

शायद आसमान ने बरस कर 

खुद को वहां खाली किया था 

वह पानी पीने योग्य था या नहीं 

यह जानने का मैंने कोई 

प्रयत्न नहीं किया 

जानकर करना भी क्या था 

लेकिन मेरे लिए फिर वहां कोई 

जगह नहीं थी 

फिर मुझे तालाब मिला 

पोखर मिला 

झील मिली 

नहरें मिलीं 

नदियां मिलीं 

नाले मिले लेकिन 

इन सबकी भी अपनी अपनी 

कहानियां थीं 

मेरी कहानी को सुनने का 

किसी के पास समय नहीं था 

अंत में मुझे 

समुंदर मिला 

यह मुझे इन सब में 

सबसे विशाल लगा 

मुझे इस बार विश्वास था कि 

यह मेरे आंसुओं को 

अपने भीतर सोख लेगा 

और मेरे दिल में भरे 

दुखों को हल्का करके 

मुझे खुश करेगा 

मेरा दोस्त बनेगा 

मेरा हमदर्द बनेगा 

मैं समुंदर के किनारे किनारे 

टहल रही थी 

यह सोचती हुई कि इस बार तो 

मेरे साथ अवश्य ही कुछ अच्छा 

होगा लेकिन 

समुंदर की लहरें एकाएक 

आक्रामक हो गई और 

मुझे अपने किनारे से भी 

पीछे की तरफ धकेलने लगी 

वह आगे बढ़ती गई और 

मुझे पीछे की तरफ फेंकती गई 

जिस स्थान से चली थी 

मैं मायूस होकर 

सारे में घूम घूमा कर 

धक्के खाकर 

वहीं पहुंच गई 

मेरे आंसुओं को 

पोंछने वाला 

मेरे दिल को 

समझने वाला 

मेरे दुख दर्द को 

बांटने वाला 

इस संसार में कोई नहीं था 

मुझे अपनी आंखों में 

आते हुए आंसुओं को 

खुद ही कोई यत्न करके 

सुखाना था या 

उन्हें पी जाना था या 

भविष्य में कुछ ऐसा सीखना था कि 

यह आंसू कभी 

मेरी आंखों में आये ही नहीं।


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