STORYMIRROR

Kumar Vikrant

Tragedy

4  

Kumar Vikrant

Tragedy

बच्चे

बच्चे

1 min
378

उस दिन 

उन छोटे बच्चों को देखकर 

तुम हैरान थी 

क्योकि कभी तुम्हें भी 

अनगिनत बच्चों की चाहत थी। 

पर ये हो न सका 

क्योकि बच्चों के लिए 

हम दोनों को दो से एक होना था। 

ताउम्र 

तुम अकेली ही रही 

मुझे तन्हा छोड़ कर। 

बच्चे?

वो सिर्फ मेरे ख्वाबो में रहे 

तुम्हारे ख्वाबों की तुम जानो। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy