STORYMIRROR

Divyanshi Triguna

Romance Classics Fantasy

4  

Divyanshi Triguna

Romance Classics Fantasy

मेरे शब्दों का प्रेम .......

मेरे शब्दों का प्रेम .......

1 min
200

अपने सपनों की परी बनाकर,

तुमने मुझे रिझाया हैं, तुमने मुझे चाहा हैं

ऐसी कहां किस्मत मेरी, जैसा प्रेम तुमसे पाया हैं 

अब तक तो तुम कहते थे, 

 क्या चीज तेरी, मुझे तेरी ओर खींचती हैं 


लेकिन आज मैं कहती हूँ, 

तुम जैसी बात किसी और में नही

जिंदगी में पहली बार मेरी शब्द किसी को भाए हैं 

प्रेम तो बस इन शब्दों का हैं, 


 बाकी तो तुम्हारा ध्यान लगाए हैं 

 शब्द से तुम, शब्द से हम, शब्द ही प्रेम वाणी हैं 

 बस साथ तुम्हारा होना चाहिए, 

 बाकी तो मधुर जिंदगानी हैं 


तुम्हारा प्रेम रूपी धैर्य, इस दिल में रखे बैठी हूँ मैं 

जब कभी समय मिले, इस दिल को भी पढ़ लेना तुम 

यह दिल तुम्हें बहुत प्यार करता हैं, 

यह मन तुम्हारी ही बात करता हैं 


इंतजार करती हूँ मैं, तुम्हारे आने का 

ढूंढती हूं बहाने तुम से बतिया ने का 

 भूल गई सब कुछ, तुम्हें ना भूल पाई मैं 

तुम्हारा नाम लिखा हैं, मेरी जीवन कहानी में 

तुम्हारा नाम लिखा है, मेरी जीवन कहानी में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance