Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Rajesh Kumar Verma "mirdul"

Abstract


4  

Rajesh Kumar Verma "mirdul"

Abstract


मेरे सामने वाली खिड़की में

मेरे सामने वाली खिड़की में

1 min 234 1 min 234

घर के सामने वाले बगीचे में

जाने कौन सी खुशबू आती है


शायद नीम फूलों की खुशबू हो 

कड़वे से नीम की सुगंध आती है


कितने फायदे की यह है अब जो

हर कोई यहां आता- जाता है


घर के सामने वाले बगीचे में

जाने कौन सी खुशबू आती है


कोने में लगा पीपल नव वस्त्र हो 

बरगद के साथ ठंडी छांव देता है


नव कोपलों से हरे परिधान पहने

इतराती है और खूब लहराती है

सबको अपनी और लुभाती है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Rajesh Kumar Verma "mirdul"

Similar hindi poem from Abstract