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Rajesh Kumar Verma "mirdul"

Abstract

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Rajesh Kumar Verma "mirdul"

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माँ

माँ

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मां पृथ्वी है जगत है धुरी है 

मां धरा पर जीवनदायिनी है

मां के बिना सृष्टि अधूरी है...

मां ममता की छांव है

मां आंखों की काजल है

मां के बिना ममत्व अधूरी है...

मां शक्ति है रक्षक है टीका है

मां जननी है जगत है दृष्टि है 

मां के बिना कृति अधूरी है...

मां के चरणों में सारा संसार है

मां के आंचल में भरा प्यार है

मां के बिना ज्ञान अधूरी है......

मां छोटे बड़ों की संस्कार है 

मां से ही भरा पूरा परिवार है

मां सृष्टि की अनुपम उपहार है....



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